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Posted in Poems, नव-सृजन

आस 

आस —— वे दूर रहकर भी पास नहीं वे पास रहकर भी दूर रही मेरा मन बस यही कहे: ” क्या करूँ? अब जीवन जीने की बची आस नहीं।” रोज़ ढूँढती अपनी खोई छवि पर...

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Posted in नव-सृजन

शान-ए -टीचर्स

शान-ए -टीचर्स नन्हे -नन्हे क़दमों से स्कूल की ओर जाते कंधे पर बस्ता, गले में बोतल और चेहरे पर घबराहट का भाव ले जाते आँखों में मोटे -मोटे आंसू लिए स्कूल जाने से हिचकिचाते...

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अटूट बंधन

माँ – माँ  देखो न भाई सता रहे हैं न जाने क्यों बार – बार चिढ़ा रहे हैं   नहीं माँ मैंने तो कुछ नहीं किया ये ही न जाने क्यों बेवजह मेरा नाम फंसा रही है...

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दास्तान – ए – आज़ादी

चलो ज़रा उन अतीत के पन्नों को पढ़ा जाए एक बार दिल से उन शहीदों को याद  जाए   भारत में था राम – राज्य न कोई गरीब , न कोई परेशानी। फिर न जाने किसकी नज़र लग गयी...

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