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स्मृतियाँ

कई बार मैंने अपनी कोमल अंगुलियों से पकड़कर खींची थी उनकी मूँछें, नन्हीं दँतुलियों से काटी थी नाक उनकी, दोनों पैरों पर बैठ कर खेला था ‘घुघुआ-माना’ पेट को मुलायम गलीचा...

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शत्-शत् प्रणाम

उम्मीद की कंक्रीट से कर्म के धरातल पर सहयोग की तारकोल से  मजबूत बना डाला जिसने स्वतंत्रता की सड़क आत्मविश्वास की शक्ति से बेधड़क। उस महामानव को उस कर्मयोगी को उस...

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बाल-दिवस की शुभकामना

बाल-दिवस पर बाल मन को कर लें कुछ वाचाल। मन की बातें करें पुरानी बिना बजाए गाल। चाचा जी से चूरन ले लें चकमा दे दें चाची को, माँ की गोद-गलीचा बैठ के दूर करें उदासी को।...

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आतंक को धिक्कार

मुझमें जितनी असभ्यता है उससे भी नीचे जाकर मैं गाली देता हूँ उन बर्बर कृत्यों को जो आतंक से अभिहित हैं। मुझमें जीतनी भी जैसी भी सच्चाई है आज सच्चे मन ने उन्हें बटोर कर...

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नया साल हम ऐसे मनाएँ

आँख में आँसू, स्वर में माँग चिथड़े ओढ़े दिन-हीन को सब सुख दे सकें जो वे चाहें। नया साल हम ऐसे मनाएँ।। भरते पेट जो पीकर पानी बचपन में भी ना करें नादानी कटे-फटे हाथों वाले...

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