मैं हूँ मच्छर

मैं हूँ मच्छर

मैं हूँ मच्छर बड़ा खतरनाक
बचा के रखना अपनी नाक,
में जहाँ जाऊँ बीमारी फैलाऊं
और फिर किसी कोने में छिप जाऊं ।
हाथ ना में तुम्हारे आऊं
पकड़ो मुझको मै उड़ जाऊं,
कार्टू जहाँ वो अंग सुजाऊँ
डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया फेलाऊं ||

गंदे, साफ सभी पानी में
मैं अपने अण्डे देता हूँ।
कलर, टायर और गटर में
मैं मजे से रहता हदैँ।।
ऑल आउट, हिट और ओडोमॉस से डरता है
इन्हीं के प्रयोग से मैं मरता हूँ ।
अगर चाहते हो मुझसे बचना,
अपने घर को साफ, स्वच्छ रखना।।

 

– चार्वी जुनेजा

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